Amrit Booty

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मेरे पति का लिंग बहुत ही कड़ा रहता है, इतना कि वे अगर मुझे देख भी दें तो मैं गर्म होने लगती हूँ!!

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Description

“कुछ मत कहो बस मुझसे सम्भोग करो”

06.06.2017 शिवम द्विवेदी

मैं आज की छुट्टी ले रहा हूँ. आज मैंने अपना मोबाइल फ़ोन भी बंद कर दिया है अन्यथा ऑनलाइन रहने पर मुझे लड़कियां मिलने के लिए बार – बार कह कर परेशान करती हैं. मैं अपनी कहानी शान्ति से लिखना चाहता हूँ. यह उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है जो कि सम्भोग में होने वाली समस्याओं से परेशान रहते हैं.

मैं १८ साल का था जब मैंने अपना स्कूल समाप्त किया और एक कॉलेज में प्रवेश लिया. इस सन्दर्भ में मेरी मिली-जुली राय थी – एक तरफ तो मैं सोचता था कि मुझे दोस्तों के बिना पढाई करनी पड़ेगी वहीँ दूसरी तरफ़ मैं बिना किसी बंदिश वाले छात्र जीवन के बारे में सोच – सोच कर प्रसन्न हुआ करता था जिसमें मुझे तेज़ शोर वाली पार्टियों, नशे में झूमती लड़कियों (जो कि कुछ भी करने के लिये तैयार हों) की आशा थी. कितना गलत था मैं!

बेशक मुझे मेरी बनावट को ले कर कोई भी भ्रांति नहीं थी. मैं औसत कद का आम लड़का था जो कि दिखने में कुछ ख़ास नहीं था. मैं एक पढने वाला, आत्मविश्वास में कमज़ोर, छोटा लिंग वाला व्यक्ति था. यह बात शुरुआत से ही ज़ाहिर हो गयी थी कि स्कूल में जिन जुगाड़ों के चलते मैं बिना किसी ख़ास योग्यता के भी आसानी से छुप जाता था वे जुगाड़ें यहाँ कॉलेज में काम नहीं करने वाली हैं.

 

पहले ही दिन से, मैं कॉलेज की फुटबॉल टीम के लिये मज़ाक का सामान बन कर रह गया था. वे सभी बहुत ही आकर्षक थे: लम्बे, गठीले और नयी फैशन के कपड़े पहने हुए. ज़िन्दगी को सच में ज़ीने वाले! इस बात में कोई भी आश्चर्य नहीं है कि उन्हें उनकी पसन्द की कोई भी लड़की आसानी से मिल जाती. कोई भी लड़की कॉलेज की फुटबॉल टीम के किसी भी खिलाडी के साथ एक रात गुज़ारने के लिए मरती थी और टीम के खिलाडी सबसे हसीन लड़कियों को चुनते थे. तो मेरे लिए क्या बचता था? कुछ भी नहीं, केवल मज़ाक और बस मज़ाक!

मैं कभी कैंपस से बिना किसी टिप्पणी का शिकार हुए नहीं निकल पाता था; कोई न कोई मेरे बैग पर कागज़ चिपका देता जिसमे कुछ भद्दा लिखा होता या फिर कोई मेरे ऊपर नकली मलमूत्र ही फ़ेक देता. कभी – कभी वे मेरे सिर पर सिगरेट की राख़ या कटे हुए नाख़ून फेंक देते थे…. उन्हें रोकने का मेरा हर प्रयास विफ़ल ही होता, बल्कि ये उनको और भी अधिक उकसा देता था. और यह बात बताने की तो कोई ज़रुरत ही नहीं कि इन सबके चलते मैं लड़कियों की नज़र में कभी आया ही नहीं.

एक बार मैं एक स्टूडेंट पार्टी में गया था वहां पर सभी लोग मौज़ूद थे. मुझे लगा कि वे लोग मुझे भीड़ में पहचान नहीं पाएंगे और उसी बीच में किसी नशे में धुत लड़की से बातें कर लूँगा जब कि मुझे कोई देख न रहा हो. परन्तु इस पर भी मेरे भाग्य ने साथ नहीं दिया. ऐसा लग रहा था कि वे मेरे आने का ही इंतज़ार कर रहे थे और जैसे ही मैं वहां पर पहुंचा उन्होंने मेरा मज़ाक बनाना प्रारंभ करा दिया! वे बार – बार एक ही बात कह रहे थे कि “कोई भी लड़की तुम्हारे साथ नहीं जाने वाली, इसलिये अच्छा होगा कि तुम जा कर किसी वेश्या के साथ मज़े करो”! “जाओ जा कर किताबे पढो, वहीँ लड़कियां मिलेंगी”! सभी हस रहे थे, और मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं उनसे क्या बोलूं…..

ऐसा लग रहा था कि मेरी चुप्पी ने उन्हें और भी अधिक भड़का दिया और उन्होंने मुझे धक्का मारना शुरू कर दिया और तब किसी एक ने मुझे मार दिया उसके साथ – साथ कई और लोगों ने भी वैसा ही करना प्रारंभ कर दिया….उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मैं घास के मैदान मैं पड़ा हुआ था और मेरे सामने एक लड़की बैठी हुई थी जो कि कॉलेज की सबसे बदसूरत लड़कियों में से एक थी – वह मोटी और फुंसीदार थी. वह मेरे होंठों से खून हटाने की कोशिश कर रही थी उसके बाद उसने मेरी उठने में मदद की और बाद में मेरे साथ हॉल में गयी. जब हम लोग मेरे कमरे में थे तो उसने मेरी बिस्तर पर लेटने में मदद की. इससे पहले कि मुझे कुछ समझ आता वह मेरे ऊपर आ चुकी थी और मैं उसके अन्दर था. मुझे लग रहा था कि मैं सब ठीक से कर रहा हूँ लेकिन जब उसने पूंछा कि “क्या तुम अन्दर हो?” तो इसका मतलब हुआ कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था. मैंने अपनी हर संभव कोशिश की, क्योंकि सम्भोग के लिए ही तो मैं पार्टी में गया था! परन्तु मैं बहुत ही जल्दी ठंडा पड़ गया – मेरा वीर्य बस १ मिनट में ही निकल गया और मैं निढ़ाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ा.

सुबह जब मैं कॉलेज में एक लेक्चर के लिए आया तो मैंने यह देखा कि सब कोई मेरी तरफ़ द्वेष, दया और अवमानना की भावना के साथ देख रहा था. पहले तो मुझे लगा कि कल की मेरी मार के कारण ऐसा हो रहा है परन्तु इसका कारण तो कुछ और ही था. बेशक रातों – रातों मैं अपने “ग्रहों की चाल” के कारण तो नहीं ही प्रसिद्द हुआ था. परन्तु जल्द ही सब साफ़ हो गया जब मैंने हॉल में प्रवेश किया; वही कल वाली लड़की वहां पर खड़ी हुई थी.

वह वहां पर अन्य लड़कियों से घिरी हुई खड़ी थी और जैसे ही उसने मुझे देखा उसने उन लड़कियों के कान में कुछ कहा और वे सब मुझे देख कर बुरी तरह हँसने लगीं. बेशक मुझे पता चल गया था कि वह उन लड़कियों को क्या बता रही है – यही कि मैं जल्दी ठंडा पड़ जाता हूँ और बिस्तर में किसी मशीन की तरह कुछ ख़ास नहीं कर पाता.

मुझे उनसे आँखें मिलाने में भी दिक्कत हो रही थी. मैंने अपने दोस्तों से मिलना जुलना और कहीं भी बाहर जाना यह सोच कर बंद कर दिया कि जल्द ही वे इस घटना के बारे में भूल जायेंगे परन्तु यह केवल और भी बुरा ही होता गया! पार्टी के लगभग एक सप्ताह बाद मैं ज़िम में देर तक रुका हुआ था क्योंकि मुझे कोच ने सारे सामान को व्यवस्थित रखने का ही काम दिया था और जब मैं वापस लौटने ही वाला था कि पूरी फुटबॉल टीम अपनी-अपनी महिला मित्रों के साथ आ गयी. उन्होंने मुझे फ़िर से घेर लिया और हसना प्रारंभ कर दिया. वे लगातार कह रहे थे कि मेरी महिला मित्र मुझसे ख़ुश नहीं जिसकी सज़ा मुझे ज़रूर मिलनी चाहिए. और स्नेहा (जो कि कप्तान की महिला मित्र और कॉलेज की सबसे हसीन लड़की है) ने कहा कि मैं इतना बुरा हूँ कि मोटी रश्मि (सब उसे मोटी कहते थे) भी मेरा निष्क्रिय लिंग और पीला फूला हुआ शरीर नहीं देखना चाहती है.

और इसके बाद… मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि मेरे साथ कुछ इतना बुरा हो सकता है – उन लोगों ने मुझे टेप से बांध दिया और हॉल में सबके सामने घुमाया और उसके बाद बाथरूम में सबसे गंदे कमोड में मेरा सर डाल दिया.

जब मैं बाथरूम में पूरा मलमूत्र से भीगा हुआ बैठा हुआ था तो मैंने सोचा कि मेरे पास केवल २ रास्ते हैं – या तो मैं ख़ुद को मार डालूं या फ़िर ज़िम जाना प्रारंभ कर दूँ. अगर मुझे कॉलेज में रहना है तो मुझे लड़ना सीखना होगा, मुझे ऐसा लड़का बनना होगा जिस पर सब लड़कियां मरा करें जिससे मैं यह सिद्ध कर सकूँ कि वे लड़के मेरे सामने कुछ भी नहीं हैं. मैं बहुत ही दृढ़-संकल्पित था और अगले ही दिन मैं यह सोच कर ज़िम चला गया कि यह मेरी ज़िन्दगी में अवश्य कुछ परिवर्तन लाएगा परन्तु यहाँ भी मेरे हांथों में केवल निराशा ही हांथ आयी!!

जैसे ही मैं ज़िम में गया लोगों ने एक दुसरे के कान में कुछ कहना प्रारंभ कर दिया और उसके बाद मुझे बस हँसी के ठहाके सुनाई पड़ रहे थे. जब भी मैं वजन उठाने का प्रयास करता तो लगभग सभी लोग मुझ पर हंसने लगते थे. मैं बहुत रोना चाहता था और भाग कर कहीं दूर जाना चाहता था परन्तु फ़िर भी मैंने अपने बेबकूफी भरे प्रयासों को बंद नहीं किया और भागने की वजाय ट्रेडमिल पर भागने लगा… उन लोगों ने मुझसे कुछ कहा नहीं क्योंकि कोच ज़िम में ही थे अगर वे होते तो शायद बाथरूम वाली कहानी फ़िर से दोहरा दी जाती.

ट्रेनिंग को लगातार कर पाने का तो सवाल ही नहीं था. मुझे कोई अन्य उपाय चाहिए था जिससे कि मैं यह सिद्ध कर सकूँ कि मैं भी “कूल” हूँ. इस मामले में मैं भाग्यशाली था क्योंकि क्रिसमस की छुट्टियाँ नज़दीक ही थी और मैं कुछ दिनों के लिए वापस घर जा सकता था. मैं बेसब्री से इस क्षण का इंतज़ार कर रहा था कि कब छुट्टियाँ आयें और मुझे घर जाने का मौका मिले क्योंकि सच में मैं बहुत थक गया था. इसके बाद मैंने इन्टरनेट पर अपनी इस समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया; इस दौरान मैंने अन्य कई लोगों को जाना जो कि मेरी जैसी समस्या से ही परेशान थे. अब मुझे बस यह जानने की ज़रुरत थी कि वे इसका समाधान कैसे कर रहे हैं; और फ़िर मुझे एक ऐसा ब्लॉग मिला जिसने मेरी पूरी ज़िन्दगी परिवर्तित कर के रख दी..

उसका नाम अनुराग मिश्रा था और वह भी कभी मेरे जैसा ही हुआ करता था. छोटे लिंग वाला पढने वाला बंदा, असुरक्षित और अपने साथियों के द्वारा प्रताड़ित किया हुआ – मज़ाक उड़ाने के लिए एक सबसे सही लक्ष्य… उसे बिल्कुल मेरे जैसे ही प्रताड़ित किया गया था और यहाँ तक कि उसकी स्थिति मुझसे भी कहीं गई गुज़री थी. उसने ख़ुद को परिवर्तित करने का निर्णय लिया, क्योंकि पूरे कॉलेज की धारणा को बदल पाना असंभव था. उसने व्यायाम करना प्रारंभ किया परन्तु शुरुआत में कुछ भी अच्छा नहीं हुआ. मेरे जैसे ही उसका ज़िम में मज़ाक बनाया गया. परन्तु उसके कोच ने उससे कहा कि “इन लोगों को हँसने दो, क्योंकि जल्द ही स्थितियां सही होंगी. तुम्हे सबसे अच्छी लड़की मिलेगी और तुम्हारा शरीर बहुत ही आकर्षक बन जायेगा.” और उसके कोच ने उसे एक कैप्सूल की बोतल दी जिस पर amrit booty लिखा हुआ था. पहले तो अनुराग को लगा कि यह साधारण सप्लीमेंट वाले कैप्सूल हैं जो कि उसकी शक्ति और कामेच्छा को बढ़ाएंगे, परन्तु बाद में यह पता चला किamrit bootyतो इससे कहीं आगे थी!

जब अनुराग ने इन कैप्सूल को लेना प्रारंभ किता तो उसे अहसास हुआ कि अब वह पहले से कहीं बेहतर लग रहा था. सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह कि उसका लिंग भी अब पहले से बेहतर लग रहा था. उसमे कड़ापन कहीं देर तक रहता और आकार में भी वृद्धि हुई थी! उसकी प्रेषित की हुई तस्वीरें यह सिद्ध करती हैं कि amrit booty सच में कार्य करता है! तब मुझे अहसास हुआ कि मुझे भी इसको आज़माना चाहिए और मैंने

amrit booty को मंगवा लिया और इसके आते ही मैंने इसका सेवन भी प्रारंभ कर दिया. मैंने अपने स्थानीय ज़िम में जाना भी प्रारंभ कर दिया. सेवन के सातवें दिन ही मैंने बहुत बड़ा परिवर्तन महसूस किया- मेरा लिंग पहले से बड़ा और मज़बूत हो गया था हर सुबह यह किसी लोहे की रॉड जैसा कठोर होता था. मुझेमें आत्मविश्वास वापस जाग्रत होने लगा. साथ ही साथ मैंने लगातार व्यायाम भी किया. अगले सप्ताह भी मैं लगतार amrit booty का सेवन करता रहा. साथ में मैंने व्यायाम करना और लिंग का आकार मापना भी ज़ारी रखा.

परिणाम स्वरुप, मेरी मांसपेशियां आने के साथ-साथ उर्ज़ा और लिबिडो में भी वृद्धि हुई. मैं अब एकदम बदल चुका था! मैं वापस कैंपस में जाने के लिए बेचैन था. मैं लड़कियों की नज़र में सबसे अच्छा बन जाऊंगा और इसके बाद मुझे कोई भी लूज़र कह के नहीं संबोधित करेगा और न ही कमोड में मेरा सर डालेगा…

कॉलेज वापस जाने के पहले मैंने पुनः अपने लिंग का आकार मापा  बढ़ गयी थी! मैं अब ज्यादा विश्वास से ओत प्रोत लग रहा था. इसमें ज़िम का भी शुक्र है कि मुझे गठे हुए सिक्सपैक और बाइसेप्स प्राप्त हो गए. बेशक यह एक अलग ही शिवम् था जो कि वापस अपने कॉलेज जा रहा था…

मैं कैंपस में देर रात से पहुंचा जिसके चलते मुझे कोई देख नहीं पाया था. अगली सुबह मैं लेक्चर के लिए गया तो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं हॉल में स्लो मोशन में चल रहा हूँ. मुझे तो लगा कि हमेशा की तरह लोग मुझे घृणा की नज़र से देख रहे हैं परन्तु तब मुझे अहसास हुआ कि लड़कियां मुझे आनंद से देख रही थी और लड़के मुझे संदेह की नज़र से देख रहे थे. किसी ने भी उस दिन मेरी पीठ पर कोई भी टिप्पणी वाला कागज़ नहीं लगाया और न ही कोई फ़ालतू चीज़ मेरे ऊपर फेंकी.

लेक्चर के समय मुझे स्नेहा (कप्तान की महिला मित्र जिसने मेरा मज़ाक बनाया था) का ख़त प्राप्त हुआ जिसमे लिखा था कि “वह मुझे अच्छे से जानना चाहती है.” तो मैं उस पर तैयार हो गया और उस रात amrit booty ने बहुत सही काम किया. मुझमें कड़ापन बहुत देरी तक बना रहा.

मैंने स्नेहा के साथ करीब ८ घंटे बिस्तर में गुज़ारे जिसमे ज्यादातर समय हम लोग बस सम्भोग कर रहे थे.

उस रात सच में मैं अपने आप को सम्भोग के दैत्य जैसा महसूस कर रहा थे! पहले मैं सोचता था कि ये सब बस कहने की बातें हैं परन्तु उस रात मैंने सच में इसे महसूस किया. मैं अपनी जीत की कुछ यादों को रखना चाहता था जिसके लिए मैंने अपने कारनामों के कुछ वीडियो बना लिए. किसे पता था कि यही मेरा शौक बन जायेगा!

अगले दिन फिर वही नज़ारा मेरे सामने था जैसा मोटी रश्मि के साथ हुआ था. सभी लोग मेरी तरफ़ देख रहे थे परन्तु इस बार यह एकदम अलग था. लड़कियां मुझ पर हंस नहीं रही थी न ही मेरे नीचे देख रही थी. वे मुझमें दिलचस्पी दिखा रही थी और निसंदेह जानने का प्रयास कर रही थी कि वे कैसे मुझसे बातें करें.

इस बात को तो बताने की आवश्यकता है ही नहीं कि उन “तथाकथित कूल लड़कों” ने मुझे मेरी प्रसिद्धि के चलते मुझे परेशान करना बंद कर दिया था, शुक्र है amrit booty का कि मैं बहुत तेज़ी से प्रसिद्द हो रहा था और उनकी प्रसिद्धि घट रही थी. दूसरा सेमेस्टर खत्म होने वाला था और मैं लगातार amrit booty का सेवन और व्यायाम करता रहा. परन्तु मैं इससे बहुत ज्यादा उत्साही नहीं हुआ था.

मैं अनुराग मिश्रा के बारे में ज्यादा नहीं जानता, बस इतना जानता हूँ कि वह एक ब्लॉगर है जिसे मैंने ६ महीने पहले खोज़ा था परन्तु मेरे दिल में उस व्यक्ति के लिए बहुत ही सम्मान है! मैं नहीं जानता कि अगर मुझे उसका ब्लॉग न प्राप्त हुआ होता तो मेरे साथ क्या-क्या होता….

इसलिए दोस्तों अपने प्रति दुनिया के बदलने का इंतज़ार न करें! किसी के साथ सम्भोग करने के लिए भाग्य का इंतज़ार न करें! औसत चीज़ों से अपने को खुश मत करें! केवल सबसे अच्छे का चयन करें! इसीलिए amrit booty का सेवन करें!

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